जानकारी, भागीदारी, सुनवाई, कारवाई और सुरक्षा से होगी लोकतंत्र की रक्षा – निखिल डे

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प्रेस विज्ञप्ति
16.04.2016

हमारा पैसा हमारा हिसाब

जानकारी, भागीदारी, सुनवाई, कारवाई और सुरक्षा से होगी लोकतंत्र की रक्षा – निखिल डे

अररिया 16.04.2016: देश भर में सूचना का अधिकार आन्दोलन की शुरुआत करने और सूचना का अधिकार कानून, 2005 बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने सर सैयद लाइब्रेरी में जन जागरण शक्ति संगठन और बिहार यूथ आर्गेनाईजेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित परिचर्चा में अररिया शहर के आर. टी. एक्टीविस्ट, विद्यार्थियों और  प्रबुद्ध जनों को संबोधित किया |

श्री डे ने कहा कि देश में 80 लाख आर. टी. आई आवेदन हर साल किया जा रहा है और लोग “हमारा पैसा हमारा हिसाब” के नारा को जमीन पर उतार रहे हैं | उन्होंने कहा कि अगर अररिया के लोग सूचना से लैस होकर, अपनी समस्याओं और इलाके की समस्याओं को लेकर संग बैठने लगे तो बहुत परिवर्तन सम्भव है | जानकारी, भागीदारी, सुनवाई, कारवाई और सुरक्षा पाँच ऐसे मन्त्र हैं जो लोकतंत्र को बहुत मजबूत करेंगे | उन्होंने कहा कि हमें सबसे पहले जानकारी चाहिए कि हमारा  पैसा कहा खर्च हो रहा है लेकिन वह भी काफी नहीं इसलिए पैसा कैसे और किन चीज़ों में खर्च हो इसमें भागीदारी चाहिए | अगर चीज़ें ठीक नहीं तो हमारी शिकायतों की सुनवाई होनी चाहिए, उसकी लिखित प्राप्ति मिलनी चाहिए और फिर सुनवाई के बाद कारवाई होनी चाहिए | इन सभी चीज़ों में शिअकायत करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए क्यूंकि आज सबसे पहले हमला शिकायतकर्ता पर हो रहा है | उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग पढ़ा लिखा है इसलिए आर.टी.आई का इस्तमाल अच्छे से कर सकता है लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि सूचना के अधिकार आन्दोलन की शुरुआत तब हुई जब आकाल राहत कार्य पर काम करने

वाली अपढ़ महिलाओं ने अपनी मजदूरी के सवाल को लेकर कागज़ (मास्टर रोल , एम् बी.) दिखाने की मांग करने लगीं|

चर्चा में अररिया शहर में विभिन्न क्षेत्र में कार्यरत एवं सामाजिक रूप से सक्रिय कोगों ने भाग लिया जैसे डा एस आर झा, अजय कुमार सिंह, डा नैयर हबीब, कामायनी स्वामी, मो० जाहिद, मो० तौसीफ, मो० तारीक जितेन पासवान, आशीष रंजन, गोपाल अग्रवाल एवं कई अन्य नागरिक शामिल हुए |

संपर्क : मो० जाहिद (9471016322) कामायनी स्वामी (9771950248)

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  1. बड़े हीं दुखद की बात है हमारे यहां, असली चोर बाहर, नकली चोर अंदर, ऐ हमारे भारतीय सभ्य समाज में रहने वाले ऐसे लोग जो कि हर तरफ से कमजोर रहता है! जिस पर पुर्ण अधिकार बड़े लोगों का होता है, और हर योजना का लाभ बड़े लोगों के हाथ में चला जाता है! उदाहरन:- अगर सरकार की तरफ 100 रूपये मिलता है तो, उसमें से मात्र 30 रूपया ही लाभ/सहायता उन तक पहुँचता है, फिर भी वे लोग बेईमान की हीं तारीफ की पुल बाँध लेतें हैं! ऐसे लोगों की मूलअधिकार के बारें में कैसे जानकारी दिया जा सकता हैं?
    ऐसे लोगों को देखने के लिए कोई नहीं आता है,न ही तो सरकारी संस्था ना हीं तो गैर सरकारी संस्था!
    समय बीत जाने पर देश में तरह-तरह के बातें होने लगता है !
    कभी सरकारी बयान तो कभी गैर संस्थाओं की बयान से पुरे सरकार हिल जाने लगता है,
    ईस तथ्य को पुरे देश में टेलिवीजन क़े जरिए से हर एक लोगों तक तुरंत पहुँचा दिया जाता है ! इसे देखाकर देश के लोगों की ध्यान दुसरे तरफ मुड़ जाता है!
    और उस आदमी का नाम तक गुम जाता है,
    ऐसा क्यों?
    कैसा लोकतंत्र?
    कैसा संविधान?
    हमारे अनुभव से देश में जितना अत्याचार एवं सोशन अंग्रेजी हुकूमत में नहीं हुआ होगा,
    उससे कई गुणा ज्यादा अत्यचार एंव सोशन अभी की हुकूमत में हो रहा है!
    ऐसा हुकूमत हमें नही चाहिए!
    रंजीत (राउत) यादव
    “की कलम से”